ग़ज़ल*****

हम तुझे देख कर मुस्कुराते है
रातों में अक्सर गुनगुनाते है.!

इश्क़ उनको नहीं अगर हम से.,
फिर भला ख़्वाब में क्यूँ आते हैं.!

दिल को पर्दे में भी लुभाते है
तो वो चेहरा ही क्यूं छुपाते है.!

पहले से ही घायल हु मैं तो
फिर क्यों वो अदाएं दिखाते हैं.!

चाहते हैं हद से ज्यादा वो,
राज मुझसे मगर छिपाते हैं.!

नही मिलती हो दूर रहती हो तुम
तेरी तस्वीर से हम नैन लडाते है.!

कभी जिनको थी कद्र मेरी
वो मुझे अब क्यों रुलाते है.!

चाहत में मेरी कोई कमी तो नहीं
क्योँ भला हमें रोज़ आज़माते हैं.!

कतरा हो जाऊंगा एक पल में
मुझे वो क्यों इतना तड़पाते है.!

उनसे क्या गिला करना अरमान
गुजरी बातों को अब भुलाते है.!

शायर-अरमान बाबू…
11-10-2017
जोधपुर(राजस्थान)