हुस्न जब बे ईमान होता है/लक्ष्मण दावानी

हुस्न जब बे ईमान होता है
इश्क का इम्तिहान होता है

कहते है प्यार सब यहाँ जिसे
ज़ेरे – पा आसमान होता है

ले चलो उस बज्म में यारो अब
बेवफा – हाँ महान होता है

हम गलत है ये मान लेते है
झूठ का भी बखान होता है

लफ्ज़ जुबाँ से कैसे फिसलते
दिल जला बे जुबान होता है

हाल -ऐ-दिल किसे बताये हम
दर्दे दिल में तूफ़ान होते है

टूटे है जिनकेदिल जहाँ पर भी
वो यहीं बाद बान होते है
( लक्ष्मण दावानी ✍ )
आई – 11 पंचशील नगर
नर्मदा रोड़ ( जबलपुर म,प्र, )

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *