🙏🏻कोई बतायेगा 🙏🏻

कौन सदा साथ यहाँ निभायेगा ।
क्या,कोई मुझको जरा बतायेगा ।।

साँसें अपनी आस भी है अपनी ।
फ़िर कोई क्यों बेवजह तड़पायेगा ।।

मैं कोई जलता हुआ चराग़ तो नहीँ ।
जो हवाओं का झोंका बुझा जायेगा।।

कोहराम सारे शहर में फैला क्यूँ है।
क्या फ़िर फरिश्ता कोई यहाँ आयेगा।।

रहग़ुजर कब थमीं है इस जमाने में ।
जो चंद फसादों में अब थम जायेगा ।।

हौसला रख अनिल परिंदे लौटेंगे ।
अमन का बाग़ फ़िर लहलहायेगा ।।

स्वरचित
अप्रकाशित
पं अनिल

अहमदनगर महाराष्ट्र

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