हमनें विकास की मिसाल/जग्गू नोरिया

हमनें विकास की मिसाल कायम करने की ठानी है।
अफ्सरों ने गिराने की हर कोशिश करने की ठानी है।।

कैसी कशमकश चल पड़ी है न बात आनी जानी है।
दोस्तो ! हर दिन लिखनी कामचोरों पर नई कहानी है।।

क्रान्तिकारियों पर बरसते आये हैं अंगार सदियों से।
आगे भी बरसेंगे पर रुकेगी नहीं यह चाल तुफानी है।।

पड़े न मरोड़ पेट दर्द की पीड़ा किसने क्या जानी है।
कड़वी गोली हकीम की , दर्द जड से अब मिटानी है।।

सेवक बन कर सेवा करते नहीं की खूव मनमानी है।
पगार पर पलता नोकर देखो कितना क्रूर अभिमानी है।।

मदद करनी जिन्हें थी , रुकावट बने आज वोह सुनामी हैं।
जनता का पैसा हड़पने की,सरकार ने न जाने क्युँ ठानी है?

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