अधर धरे हरि बाँसुरी/डॉ मीना कौशल

अधर धरे हरि बाँसुरी,मधु मोहक मुस्कान।

नलिन नयन शोभा धरी,छवि अनमोल सुजान।।..1
सजल नयन श्यामल बदन,ललन दशन सुख देत।

हाथ गहे माखन किशन,रदन वदन समवेत।।….2
ठुमक चले गोपाल जी,भक्तन के प्रतिपाल।

लपटायो माखन वदन,शोभा सुखद निहाल।।…..3
मुखमण्डल नीरज नवल,अलक भ्रमर लपटाय।

भाल तिलक सूरज अमल,छवि दरशन हुलसाय।।….4
धन्य यशोमति के लला,धन्य हमारो नैन।

जपत नाम होवे भला,सुख पायो दिन रैन।।…..5
मकराकृत कुण्डल कनक,उर वैजन्ती माल।

अति मोहक शीतल नयन,मधुमोहक छवि भाल।।….6
पीत बसन फुल्लित कमल,अमल नवल शुभ दातु।

पैजनियाँ छम छम करत,पुलक यशोदा  मातु।।…….7
नृत्य करत वसुधा परत,उठत गिरत पुलकात।

कृत्य करत अनुपम सुखद,अति पुलकित मृदु गात।।…..8
शुभ्र चन्द्रमा देखकर,बालक मन हरषाय।

माँग रह्योभुवि लोटकर,मातु रही समझाय।।…..9
चन्द्र उतार् यो थार में,वारि कनक की थार।

रूठ रहे गोपाल जी ,मातु रहीं अब हार।।…..10

डा.मीना कौशल

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *