बरसात सुहानी लगती है
बूंदों से जब सजती है |
धीरे – धीरे तन को भिगोती
मन मे फिर घर करती है ||
बरसात सुहानी……………………..!

एहसास नया जगाती है
अपनों की याद दिलाती है |
हर सपनों को जवां करती है
खुशी से तन के हर हिस्से से यूँ ही खेला करती है ||
बरसात सुहानी ……………………………..!

छतरी का उड़ जाना बारिस में
नए चेहरों से मुलाकात करा जाती है |
इक अनकहीं हँसी होठों पर यूँ ही खिल जाती है ||
बरसात सुहानी…………………………!

बरसात सुहानी लगती है,
कवि (हेमन्त) से कह जाती है |
धन्य है तेरा जीवन कवि (हेमन्त)
जो कविता तेरी हर दिल को यूँ ही छू जाती है ||
बरसात सुहानी………………………!

कवि – हेमन्त पाण्डेय (अमेठी)
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