कीमत हमारे वोट की/युद्धवीर टंडन

कीमत हमारे वोट की

मनुष्य जब इस धरा पर आया उस समय उसकी जरूरतें बहुत कम थीं और जो जरूरतें थीं भी उनको वह बड़ी सरलता से स्वयं ही पूरा कर पाने में सक्षम था| उस समय जीवन आज के समय के जीवन के समान जटिल नहीं था| इसके बहुत से कारण हैं जिनमें से प्रमुख है जनसंख्या का तीव्र गति से बढ़ना और संसाधनों का उतनी तीव्रता से न बढ़ पाना| इस कारण आज हर जगह पर एक दौड़ सी छिड़ गई है किसी से आगे निकलने की नहीं बल्कि सबसे आगे निकलने की और शायद यही कारण है कि यह दौड़ खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही है| इस परिस्थिति में सामंजस्य उत्पन्न हो इसके लिए हमें संसाधनों के न्यायोचित वितरण की जरूरत महसूस हुई और जनता में से जन प्रतिनिधियों की उत्पति हुई|
पहले यह काम किया धर्मगुरुओं ने वो स्वयं को ईश्वर का दूत बता कर लोगों को अपनी बातें मनवाने के लिए डराने लगे| जब उनके आडम्बर बढ़ते चले गये और वो जनता की भावनाओं से खुद को जोड़ कर नहीं रख पाए तो उनके वर्चस्व को चुनौती दी राजाओं ने लेकिन यह भी हालत नयी बोतल में पुरानी शराब वाली ही थी| अब धर्म गुरुओं का स्थान ले लिया इस राजाओं ने जिनका हर एक शब्द कानून और हर एक निर्णय पत्थर की लकीर माना जाने लग पड़ा| इका दूका राजाओं को छोड़ दिया जाये तो बाकि सब का एक ही लक्ष्य था अपनी सत्ता की रक्षा हर कीमत पर और अपनी ताकत को बढ़ाते चले जाने की होड़|
शुरू में तो फिर भी कुछ ठीक था परन्तु एक समय के बाद हालात बद से बदतर होते चले गये| और होते भी क्यूँ नही जिनकी नियत में ही राज करना था वो सेवा का ढोंग कब तक करते| अब इसे में एक रास्ता था की लोग या तो अपने उपर हो रहे अन्याय और अत्याचार को सहते रहते या फिर इस अन्याय के विरोध में आपनी आवाज को बुलंद कर अपने अधिकारों के लिए लड़ते| लोगों ने स्वभाविक रास्ता चुना और उखाड़ फेंका राजतन्त्र की उस सड़ी हुई बेड़ी को| लेकिन यह सब कुछ इतना भी आसन नहीं था जितना की सुनने में लग रहा है राजाओं में अपना जी जान लगा दिया अपने वर्चस्व को बचाए रखने में लेकिन जब क्रांति आती है तो उसके आगे आने वाली सब दीवारें गिरने को मजबूर हो ही जाती हैं|
इस प्रकार विश्व में लोगों को उनका मूलभूत जन्मसिद्ध अधिकार स्वयं पर शासन करने का अधिकार मिला| और अगर बात करें भारत की तो हमारे देश के लोगों के लिए तो अभी भी यह एक स्वप्न ही था चूँकि दुर्भाग्य वश जब विश्व के अन्य देशों में राजतन्त्र के विरुद्ध क्रांतियाँ हो रही थी तो उस वक्त भारत में अभी एसी कोई हवा नहीं चली थी| इससे पहले की हमारे राजाओं से हमें मुक्ति प्राप्ति हेतु संघर्ष की चेतना आती हमारे राजाओं ने अपनी योग्यता या आपसी फूटों के चलते हमें एक बहुत बड़े संकट में डाल दिया था हम अब अंग्रेजों के गुलाम थे और गुलामी में सोचने विचारने की आजादी नहीं होती|
लेकिन कहते हैं न कि सूर्य बादलों से कुछ समय के लिए ढक तो सकता है लेकिन सदैव के लिए डूब नहीं सकता भारत रूपी सूर्य के आगे छाये गुलामी के बादल भी धीरे धीरे छटने लगे| लोगों में चेतना आयी क्रांति कारी शख्सियतों ने भारत भूमी पर जन्म लिया और अपने लहु की एक एक बूंद को देश के लिए कुर्बान करते हुए हमें आजादी दिलायी| आजादी दिलायी खुद पर शासन करने की अपने फैसले खुद ले सकने की| यह सब उन्हीं की ही शहादतों का नतीजा है कि आज हमें वोट देकर अपने भविष्य को चुनने मिला है| बिना किसी भय के, लालच के, भ्रम के, बहकावे के, अपने दिल की आवाज को सुन कर फैसला करें और अपने आने वाले के निर्माण का जिम्मा किसी होनहार को दें| वोट देने का अधिकार हमें इतनी सरलता से नहीं मिला है इस की कीमत को समझिये और अचित फैसला कीजिये| वोट न देना उन शहीदों का अपमान है जिन्होंने आपको यह अधिकार दिलाने के लिए अपनी इहलीला समाप्त कर ली और शुशी ख़ुशी फांसी के फंदे को चूम लिया| पुरे विश्व के लोगों ने ही मतदान के अधिकार को पाने के लिए बलिदान दिए हैं लेकिन भारत में यह बलिदान खून के रहे हैं| अपने वोट को बोझ नहीं बल्कि दायित्व समझें|
अतः आप सभी हिमाचल वासी जरुर मतदान के दिन अपना अपना मत दें ताकि आपके सपनों को पंख लग सकें|

जय हिन्द …
युद्धवीर टंडन (कनिष्ठ आधारभूत शिक्षक रा. प्रा. पा. अनोगा) गावं तेलका जिला चम्बा हि. प्र. पिन कोड 176312 मोब. 78072-23683

One comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *