हमें जीने के लिये/सुरेश भारद्वाज निराश

ग़ज़ल

हमें जीने के लिये कुछ तो करना होगा
बार बार न सही इक बार तो मरना होगा।

हालात कैसे हो गये है समझ नहीं आता
इस दर्द के दरिया में फिर उतरना होगा।

रहमत तेरी ऐ खुदा अब नज़र नहीं आती
बेदर्द बड़ी है दुनियाँ सबसे डरना होगा।

पतवार जख्मी हो गया कश्ती बचाउँ कैसे
डूवना हुआ है लाज़मी खुद ही तरना होगा।

मत कर अठखेलियाँ चंचल न हो इस तरह
बाकी अभी हैं इम्तहाँ जिनसे गुजरना होगा।

न छोड़ करना पैरवी भूली विसरी यादों की
वक्त की दहलीज़ पर जख्म तो भरना होगा।

मनमानी बहुत कर ली तूने इस अंदाज़ से
वक्त आ गया निराश अव तो सुधरना होगा।

सुरेश भारद्वाज निराश
ए.58 न्यू धौलाधार कलोनी लोअर बड़ोल
पीओ दाड़ी धर्मशाला हिप्र.
176057
मो० 9418823654

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *