जब भैय्या दूज का त्यौहार है आता/नंद किशोर परिमल

भैय्या दूज के अवसर पर
जब भैय्या दूज का त्यौहार है आता।
यम यमुना की यह है याद दिलाता।
एक बार यम काम में जूझ गया था।
बहिना का स्मरण वह भूल गया था।
अर्से बाद बहिन यमुना का ख्याल जो आया।
दौड़ा दौड़ा वह बहिन यमुना के द्वार पे आया।
बहिना ने सत्कार किया और उत्सव मना कर।
अपने हाथों खाना बना कर, माथे पर तिलक सजाया।
भाई को बहिना ने बड़े चाव से पकवान खिलाकर।
भैय्या दूज का यह खूब त्यौहार मनाया।
यम ने प्रसन्न हो बहिना को वरदान दिया यह। कालिंदी नहा कर, जो इस दिन बहिना के घर त्यौहार मनाए।
यम कभी उसके सम्मुख टिक न पाए।
आज भी पवित्र त्यौहार यह, बहिना भाई प्रेम की याद दिलाए।
आज के दिन भाई अपनी बहिना के घर को दौड़ा दौड़ा आए।
भैय्या दूज त्यौहार है पावन, बहिना भाई के माथे पर तिलक सजाए।
भाई भी बहिना को उपहार भेंट कर, प्रेम वशीभूत हो गले लगाए।
भारत वर्ष त्यौहारों का है देश अनोखा।
समय समय पर अनेकों पावन दिवस मनाता।
आओ संजो कर रखें, हम सब ये पावन दिवस मनाएं।
परिमल इस परंपरा को अगली पीढ़ी को भेंट कर जाएं।।

नंदकिशोर परिमल, गांव व डा. गुलेर
तह. देहरा, जिला. कांगड़ा (हि_प्र)
पिन. 176033, संपर्क. 9418187358

One comment

  1. बहुत बहुत धन्यवाद बहल जी। अनेक दिनों बाद बच्चों से आज ही साईट डाऊन लोड कराई और आपसे जुड़ सका।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *