यह शब तो दिवाली/ संजीव सुधांशु

यह शब तो दिवाली के बहाने रौशन कर ली,
वर्ना ज़िन्दगी हमने अन्धेरों में ही बसर कर ली |
हमने कभी भी तुम्हें रुसवा करना न चाहा था,
जाने क्या खता हुई जो आपने शिकायत कर ली |
साकी ने मयकदे में रिन्दों के लिए महफिल सजाई है,
और दिलजलों के लिए शमा भी रौशन कर ली |
झूठ,फरेब,दहश्त,भूख,बेबसी के मंजर हैं यहां,
ईमान से तो जैसे आदमी ने तौबा ही कर ली |
सागर जैसी गहरी आंखों में ज़िन्दगी ढूंढने निकला,
ज़िन्दगी तो मिली नहीं डूब कर खुदकुशी कर ली |
रावणों औ’ कंसों की इस भारी भीड़ को देख,
राम औ’ कृष्ण ने पैदा होने से ही मनाही कर ली |
शहर में आज इस कद्र हंगामा क्यों कर है,
सुनते हैं वाइजों ने मयकशी कर ली |
तेरी निगाहे शोख औ’ अदाओं ने सुधांशु,
इस दिल में प्यार की शमा रौशन कर ली |
संजीव कुमार सुधांशु
गांव व डाकघर च्वाई
त. आनी जिला कुल्लू
94182-72564
70188-33244

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