ग़ज़ल  

याद करां  दिल   मेरा धड़कै,

खुल्लियां हाखीं सुपना रड़कै।

कोई  औआ  दा   लग्गै इह्यां,

पैरां   दी  छेड़ा  पत्तर खड़कै।

पैहर   सवेला   सौणा   पौंदा,

अम्मा   उठाल़ी  दिंदी  तड़कै।

नेहरिया  राती  लगन ठोकरां,

दुस्सै रस्ता जे बिजली कड़कै।

कालिया धारा गढ़गढ़ लगियो,

छप्पर हिल्लै जे अम्बर गड़कै।

तेरे   बाजी   दिल   नी  लगदा,

अग्ग दिले  दी होर  भी भड़कै।

छण मण  करदी  सैह जे औए,

मिंजो  दिक्खी   जादा   मड़कै।

मेरे   लच्छण   दिक्खे   जाह्लु,

डांग   चुक्की    लेई      बड़कै।

कुआल़ुआं ढिग्गां गौही नी हुंदा,

सौखा चलणा  पधरिया सड़कै।

रोज़    करां   इन्तज़ार   मैं तेरा,

निराश   मोयी   हाख न फड़कै।

सुरेश भारद्वाज *निराश* 👿

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