ज्योति कलश छलकेगा

मीठे तेल में बाती हो, मिट्टी का दिया संहाती हो।
मीत मेरे दिवाली में फ़िर, ज्योति कलश छलकेगा ।।
महकेगा घर आग सारा, ख़ुशियों से महकेगा।
ज्योति कलश छलकेगा प्यारे ज्योति कलश छलकेगा।।

पितर लोक में पितर देव, दीपों को देख मुस्काते ।
दीप के वश में हुवे नारायण, लक्ष्मी संग हैं आते।।
दीप जले मिट्टी का, घर का कोंण कोंण चमकेगा।
ज्योति कलश • • •

मिट्टी के दीपों पे कीट पतंगे , ललचाते हैं ।
बहुत से जीव बिषैले , दीपक ताप से मर जाते हैं।।
शोर ख़लल से दूर ये ग़ुलशन, पात पात चहकेगा ।
ज्योति ••••••••

अनगिनत दोषों से मुक्ति , मिट्टी दीप दिलाते ।
विद्दुत की लड़ियों से माना, रोशन महल हो जाते ।।
मिट्टी के जब दीप जलेंगे, शत्रू दल दहकेगा ।
ज्योति कलश • • • •

🌻पं अनिल🌻

अहमदनगर महाराष्ट्र

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