तेरे साथ सफर की यादें/राम भगत नेगी

…तेरे साथ सफर की यादें …..
कुछ ऐसा था तेरे साथ सफर की यादें
जैसे प्यासा हो मन मैरा

जैसे तन मन में गुलाब की महक
जैसे मखमली बदन की कसक

जैसे सुबह की ओस
नई उमंग और नई जोश

कुछ ऐसा था तेरे साथ सफर की यादें

सुकून की नींद सांसो की गर्माहट
तेरी बोली और बातों में हडबडाहट

तेरा रूठना और मेरा मनाना
तेरा सोना और मेरा जागना

कुछ ऐसा था तेरे साथ सफर की यादें

हिलते डुल्ते बसों में झटके
बीच बीच में वे वजह मुझ पर ही भटके

गहरी नींद में तुम और भी खूबसूरत
जैसे बनी हो संगमरमर की मूरत

सफर चलता रहा तुम्हें निहारते रहा
तुम सोते रहे मैं सिर्फ तुमको ही देखता रहा

राम भगत किन्नौर

.टिकट की राजनीति ..

चुनाव आते ही चारों ओर हल्ला
अभी चला नहीं किसी का बल्ला

सभी दलों में छटनी चली
किसी को टिकट मिला किसी की बली चढ़ी

अपने ही दल में गुट बाजी
चला है जोर शोर से नारे बाजी

जनता भी आज कल मजे में
वोट जो उनका अपने कब्जे में

खुब तमाश देख रहे है
कार्यकर्ता सब बिखर पड़े है

गुटों की राजनीति अब समझ रहे है
सभी दल आपस में ही उलझ पड़े है

ये राजनति है भाईयों
यहां कोई अपना नहीं

यहाँ कोई पाप नहीं
यहां गुटबाजी एक संस्कार

आपकी जीत हो या हार
गुट बाजी राजनीति में संस्कार

राम भगत किन्नौर
9816832143

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