मुर्दे की पुन: मौत

अक्सर लोग वोलते हैं
मेरे दर्द का जिक्र करते है
कोई न सुने तो
वोह क्या करें,मैं क्या करुं
कितना झेलूं
इस असहनीय पीड़ा को
कब तक तैरुं
दर्द के अथाह सागर में
मन की गहराईयां भी तो
मुझे डुबो रही हैं
भीतर ही भीतर
मार रही हैं मेरा जिन्दा वजूद
तड़पा रही हैं पल पल मुझे
ओड़कर नकाब हंसी का
देकर चाहत जीने की
धकेल रही हैं मौत के आगोश में
मुझे
हा! कितना अज़ीव है
एक मुर्दे की पुन: मौत।

सुरेश भारद्वाज निराश🔴
न्यू धौलाधार कलोनी लोअर बड़ोल
पीओ ..दाड़ी (धर्मशाला) एचपी
176057
मो० 9418823654