मेरा इक सवाल है/हेमन्त पांडेय

मेरा इक सवाल है ,
देश के उन नेताओं से जिनके गुनाह बेहिसाब है |
मेरा किसी भी राजनीति कोई से नाता नहीं है ,
इंसान हूँ इंसानियत के दर्द से सिर्फ मेरा सरोकार है ||

मेरा एक सवाल है |
किसानों की मेहनत और फसलों का हिसाब कहा है ||
खेती करे किसान फसल की बोली तय सरकार ये गलत बात है |

मेरा एक सवाल है |
भ्रष्ट राजनीति को राष्ट्रनीति क्यों कहा जाता है ||
अगर भारत धर्म निरपेक्ष राज्य है तो जाति धर्म पर राजनीती क्यों है ?

मेरा एक सवाल है |
भारत में नोट बंदी हुई मुझे कोई एतराज नहीं है ||
यदि भारत की जनता नोट बंदी में पिसी तो क्या जनता माला – माल और ये नेता कंगाल हैं |
यदि नेता कंगाल नहीं तो इन सबनें लाइन किस बैंक में लगाई कितना काला धन सफेद करवाया हिसाब कहा है ||

मेरा इक सवाल है !
अगर प्रधान मंत्री जी विदेश दौरे पर हैं , तो बाकि मंत्री देश के दौरे पर क्यों नहीं है ||
जनता की जरूरतों से क्यों बेखबर हैं , हक़ीक़त यही है कर्मयोगी एक है बाकि भोगी सब कतार में खड़े है |
मुकदमें अदालतों में परबाबा के जबाने के पड़े हैं , जज बदल गये फ़ाइले आज भी वही है ||

मेरा इक सवाल है |
अगर इक आतंकवादी की सजा फांसी तो करोङो जनता के दिलों और मासूमों की इज्जत से खेलनेवाले बाबाओं को सिर्फ कैद क्यों हैं ?
इन्हें सजाए मौत क्यों नहीं है ?

कवि हेमन्त का इक सवाल है |
देश में भ्र्ष्टाचार और जघन्य अपराध क्यों हैं ?
मुझे समझ में नहीं आता देश रक्षक ही भक्षक क्यों हैं ?
जो शहीद होते सीमाओं पर उन नौजवानों पर भी सियासत क्यों है ?

कवि – हेमन्त पाण्डेय ( अमेठी )
‎ 9082747967

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