खूव सताया उसने भी/सुरेश भारद्वाज निराश

ग़ज़ल

खूव सताया उसने भी
बहुत रुलाया उसने भी।

कभी हाँ और’ न कभी
दिल दुखाया उसने भी।

थे छलकाय हमने आँसु
बड़ा तड़पाया उसने भी।

मुद्दत से जिसको चाहा
दिल धड्काया उसने भी।

हमने जिसके सपने पाले
हमें मिटाया उसने भी।

अपना जिसे समझा था
दर्द पिलाया उसने भी।

जीवन है आँख मिचौली
रंग दिखाया उसने भी।

ताने मीणे जग देता है
पाठ पढ़ाया उसने भी।

जिसको हमने दिल दिया
जख़्म बनाया उसने भी।

जीवन भूल भुलैंया मेरा
स्वाँग रचाया उसने भी।

जाके लिये सबकुछ छोड़ा
हमें लुटाया उसने भी।

खोल के सीना हमने रखा
तीर चलाया उसने भी।

हमने उसको अपना माना
रंग दिखाया उसने भी।

बहुत उम्मीदें कीं उससे
ग़ज़व ढाया उसने भी।

बुरे दिन थे मेरे शायद
नाच नचाया उसने भी।

कई चक्कर उसके काटे
घर न बुलाया उसने भी।

दर्द दिया लोगों ने खूव
दिल दुखाया उसने भी।

सबने हमको था दुत्कारा
न गले लगाया उसने भी।

यहाँ रहा न कोई अपना
दिल जलाया उसने भी।

परवाह करे न कोई मेरी
हमें भुलाया उसने भी।

यूँ ही भटके उसकी खातिर
दिल भरमाया उसने भी।

गहरी नदिया बीच भंवर
बहीं डुबाया उसने भी।

किसी ने मेरी बात सुनीं न
बड़ा धमकाया उसने भी।

पीड़ न जाना मन की कोई
भैद न पाया उसने भी।

लोगों ने तो नफरत की
मुँह बनाया उसने भी।

आखिर हमने जीना छोड़ा
जहर पिलाया उसने भी।

मन की लौ’ फड़फड़ाई
दीया बुझाया उसने भी।

निराश जो हमसे पीछा छूटा
शुक्र मनाया उसने भी।

सुरेश भारद्वाज निराश
धौलाधार कलोनी लोअर बड़ोल पी ओ दाड़ी धर्मशाला
हिप्र.
176057
मो० 9418823654

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