जगमग जग सारा हो /पं अनिल

जगमग जग सारा हो 

दीप जलें अन्तर्मन के अँधियारे में उजियारा हो ।
अंध तमस मिट जाये सब जगमग जगमग जग सारा हो ।।
चेतनता ऐसी आ जाये मनुज मनुज का प्यारा हो ।
अंध • • •

उजली चादर ओढे धरती धवल प्रकाश नहाये ।
कोना कोना परम प्रकाश हो धरती माँ मुस्काये ।।
मिट्टी के हों दीये दमकते दीपावली पर्व ये न्यारा हो ।
अंध • • •

बैर बिरोध के कीट पतंगे फेंको जल जाने दो ।
समता ममता प्रेम का परचम चहुँ दिक् लहराने दो ।।
कटुता मिटे प्रेम रस बरसे अमृत रस धारा हो ।
अंध • • •

नन्हें नन्हें दिये टिमटिमायेँ मिट्टी के प्यारे ।
पंक्ति ऐसी सजे धरा पर उतरे जैसे सितारे ।।
ख़ुशियाँ नाचें आँगन आँगन ऐसा हृदय हमारा हो ।
अंध तमस मिट • • •

पं अनिल
अहमदनगर महाराष्ट्र
📞 8968361211

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