मैं पक्ष न्याय का लेता/डा . सुभाष चन्द्र

आप सब की नज़र अपनी एक नई रचना प्रस्तुत कर रहा हूँ |

उम्मीद करता हूँ की आप इसे पसंद करेंगे और अपना प्यार देंगे
मैं पक्ष न्याय का लेता हूँ | 

मैं प्रबल वार कर देता हूँ ||

जो आवाजें दब जाती हैं | 

मैं उनको जीवन देता हूँ ||
ना जीत करे विचलित मुझको | 

ना कभी हार से डरता हूँ ||

मैं रण में योद्धाओं की तरह | 

संघर्ष निरंतर करता हूँ ||
सज्जन कहते मुझको सज्जन |

दुर्जन कहें लड़ाका हूँ ||

चुप हूँ तो समझो मंगल है |

बोलूं तो बड़ा धमाका हूँ ||
तंत्र भ्रष्ट हो जाए तो |

मैं काम मंत्र से लेता हूँ ||

यदि मार्ग बचे ना शेष कोई | 

फिर काम यंत्र से लेता हूँ ||
मैं नीलकंठ का अनुगामी |

मैं विष धारण कर लेता हूँ ||

यदि रिपु ना वश में आता हो | 

मोहन, मारन कर लेता हूँ ||

                       —– डा . सुभाष चन्द्र

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