दिले नादां को अब बहलाया/संजीव सुधांशु

गजल
दिले नादां को अब बहलाया न जायेगा |
अफसाना मुहब्बत का यह गाया न जायेगा ||
प्यार की राह में ठोकर लगी है आखिर |
इन्सां क्या खुदा से भी उठाया न जायेगा ||
हाथ कांप उठते हैं पैमाना जब हाथ में हो |
एक घूंट जाम भी उन्हें पिलाया न जायेगा ||
कसमें वादे जो उनके साथ किये भी हैं |
एक भी बात को निभाया न जायेगा ||
गमे इश्क़ की आग को बुझाना तो क्या |
राख पे भी हमसे पानी गिराया न जायेगा ||
यूं रूठा न करो तुम हमसे मिलकर |
हम जो रूठ गये तो मनाया न जायेगा ||
दिल में तो तस्वीर बनी ही रहेगी |
क्या हुआ गर उन्हें अपनाया न जायेगा ||
गीतों में लिख रहा हूँ यह अफसाना |
मगर किसी को भी सुनाया न जायेगा ||
तन्हा कैसे हो सकता हूँ जहाँ में सुधांशु |
दूर हमसे उनकी यादों का साया न जायेगा ||
संजीव कुमार सुधांशु
गांव व डाकघर च्वाई
त. आनी जिला कुल्लू (हि. प्र.)
94182-72564

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