ग़ज़ल*****

*हर साँस तुम्हारे नाम लिखू*

तेरी नशीली आँखों को शराब लिखू।
पुराने खतों को महकता गुलाब लिखू।।
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झुका दे अपनी पलके मेरी बाहों में।
आ मेरी हर साँस तुम्हारे नाम लिखू।।
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तू आँचल लहराए तो हवा भी अदा दिखाए।
ऐसी कुदरत-ऐ-फ़िजा को शबाब लिखू।।
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चुरा ले मुझे तू अपने ही जिस्म से।
कि मैं खुद को बंदगी-ए-आदाब लिखू।।
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मेरी रूह में उतरकर कर दे मुझ पर इनायत।
बअंदाज दैर में बैठ के तुझे महताब लिखू।।
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मेरे दिल की हर कु में है अंधेरा ही अंधेरा।
तेरी मेरी आँखे मिले तो आफ़ताब लिखू।।
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मेरी आँखों में रहती हैं हमेशा ही वफ़ा।
तेरे दर्द से मेरी दुआओ तक का हिसाब लिखू।।
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कोई लैला मंजनू पढ़ेंगे अरमान से इश्क़ का पाठ
तेरे संग ख़्वाब मे बीती जिंदगी की किताब लिखू
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*अरमान बाबू…*
*जोधपुर(राजस्थान)*