सरजमीं , आसमाँ से नजारे /लक्ष्मण दावानी

सरजमीं , आसमाँ से नजारे उठा
हुस्न ओ इश्क के वो सितारे उठा

तन पिघलने लगा चाँदनी से मेरा
शबनमी उँगलियों से शरारे उठा

आज आँचल में है चाँद तेरे छुपा
तू नज़र से जरा वो हमारे उठा

कोई ग्रहण न लग जाये यूँ चाँद पे
पहलू से तुम रकीबो को सारे उठा

दिन बदलते यहाँ याद रखना सदा
गम के मारो को दे कर सहारे उठा

बांध के सात जन्मों के बंधन यहाँ
माँग भर दूँ में ला चाँद तारे उठा
( लक्ष्मण दावानी ✍ )
29/5/2017
आई – 11 पंचशील नगर
नर्मदा रोड़ ( जबलपुर म,प्र,)

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