कैसी होड़ लगी इंसान में,
ईमान छोड़ पैसे कमाने की,
तन के साथ तो ,
सिर्फ कफन जलेगा शमशान में,
पैसा ,शोहरत,
सब घुटने टेक देते हैं ,
इस दरबार में,
जिंदा रहता है ,
सिर्फ ईमान जहान में,
फिर क्यों?
ईमान छोड़ चला इंसान,
इस राह में।

वीपी ठाकुर
कुल्लू