बापू -लाल

एक दुबल कायाधारी नें,अनुपम व्रत अपनाया।
हिंसा के राहों को जिसने था,अनुचित बतलाया।।
श्रद्धासुमन समर्पित उसको,नमन सदा हम करते।
विश्व पटल पर जिसने, सत्य अहिंसा ध्वज लहराया।।

सोटा-धोती समय बंध का,हरदम रहा पुजारी।
गोरों के आगे जिसकी थी,हिम्मत कभी न हारी।।
शांत ,सरल मुखमंडल का,अद्भुत आभा फ़ैलाया।
राम नाम का गायक अमर, करम बापू कहलाया।।

एक बीर नें सादे सरल, सबलता पर दरसाया।
ताशकंद के समझौते नें,था क़द मान बढाया।।
जीवन के हर कठिन राह पर, चला चला अलबेला।
भारत का वो भाल लाल था,रँणबाँकुर कहलाया।।

दोनों प्यारे पूजनींय भारत के प्राण ललाम।
कोटि कोटि वंदन अभिनंदन,हर जन करे प्रणाम।।
स्वदेसी की हरम यूँ ही, जलती रहे मशालें।
धन्य धन्य दोनों की माता,जो सपूत जनमाया।।

पं अनिल
अहमदनगर महाराष्ट्र
8968361211