राहो में तेरी खुशबू/लक्ष्मण दावानी

राहो में तेरी खुशबू ही बिखरा गया हूँ मै
फूल बन के तेरी राह में कुचला गया हूँ मै

आया है नज़र में जो नया रंगी नज़ारा
बदले हुए मौसम से हि शरमा गया हूँ में

सावन के घटाओने किया तरबत्तर हमको
भीगे हुए बादल के तरह छा गया हूँ मै

आँखों में है पानी मेरे होठो पे मुसल्लत
अपनी ही कहानी से यूँ घबरा गया हूँ मै

बरसो बरस आँखे ये बरसती ही रही है
मासूम खयालो से अब थक सा गया हूँ मै

तुम आ गये हो जब से मेरी ज़िन्दगी में यूँ
युँ लग रहा की दोनों जहाँ पा गया हूँ मै
( लक्ष्मण दावानी ✍ )
28/5/2017
आई – 11 पंचशील नगर
नर्मदा रोड़ ( जबलपुर म,प्र,

2 comments

    1. नावाजिशो का तहेदिल से शुक्रिया आदरणीय बहुत आभार

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