खुद को खोजो

खुद को खोजो
मन में खोजो ख्यालों में खोजो

अपनों में खोजो सपनों में खोजो
ये रुत बहार की है तनहाइयों में खोजो

क्यू इंसान आज भटका है
चापलूसी में अटका है

इधर भी तु उधर भी तु
सारे जहाँ में तु ही तु

फ़िर भी मन विचलित
कर ले बन्दे मन को संतुलित

खोज मन में जो समाया है
जो तूने अब तक कमाया है

रात भी तु दिन भी तु
ऐस और आराम भी तु

पैसा भी तु धन भी तु
इस संसार में काम रूपी तन भी तु

खोज इस जहाँ में सारी कायनात
हार भी तु जीत भी तु

मत घबरा मौत से तु
एक दिन वो भी तेरे दर पे आयेगा

सजा कर तुझको इस दुनियाँ से
काम क्रोध मोह से निकाल कर साथ तुझको ले जायेगा

खुद को खोजो
मन में खोजो ख्यालों में खोजो

राम भगत किन्नौर
9816832143