गजल
हर तरफ रावणी आतंक राम कब आयेंगे |
दुःशासन चीर हरण कर रहे शाम कब आयेंगे ||
घर-बार, जवानियां तक कुर्बान कर दी |
आंखों में सपने थे जिनके वो मुकाम कब आयेंगे ||
भ्रष्टाचार,भूख,गरीबी अब भी कायम है |
सत्तर साल के प्रयास परिणाम कब आयेंगे ||
नसों में नशा दौडा तबाह हो रहा नौजवां |
कुर्बानी का जज्बा भर दे वो जाम कब आयेंगे ||
हिज्र में ही गुजार दी हमने तो सारी ज़िन्दगी |
न जाने विसाले यार के पैगाम कब आयेंगे ||
हुस्न इश्क़ जामो साकी पर खूब लिखा सुधांशु |
ईमान जगा इन्कलाब लाये वो कलाम कब आयेंगे |
संजीव कुमार सुधांशु
गांव व डाकघर च्वाई
त. आनी जिला कुल्लू (हि. प्र.)
94182-72564