आ कर ले मुझसे आज/सुभाष सोनू

सभी साथियों एवं पाठकों के लिये अपनी एक नई नज़्म पेश कर रहा हूँ l उम्मीद करता हूँ की आप इसे पसंद करेंगे और अपना प्यार देंगे
आ कर ले मुझसे आज मुलाकात आखरी

आ कर ले मुझसे आज मुलाकात आखरी ।
कल रह गयी थी कहनी तुझसे बात आखरी ll

तेरी कसम मैं तुझ बगैर जी ना सकूँगी l
मुमकिन है आज हो ये मेरी रात आखरी ll

आके लबों पे जाने फिर वो क्यूँ पलट गयी l
हर बात के आखिर में थी जो बात आखरी ll

नाराज़ होके सांसों ने ये दिल से कह दिया l
अब धड़कनों से कर ले मुलाकात आखरी ll

बातें ज़माने भर की तुझ से कर के आ गयी l
जो दिल की थी ना कह सकी वो बात आखरी ll

आ कर ले मुझसे आज मुलाकात आखरी l
कल रह गयी थी कहनी तुझसे बात आखरी ll
डा. सुभाष सोनू

21-09-2017

3 comments

  1. हर बात कि आखिर मैं ं थी बात आखरी…..बाह
    सुन्दर।

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