हर वर्ष जलता है रावण यहाँ
हर वर्ष जलता है रावण यहाँ
अहंकार पर जीत है ये

लोभ जलता है मोह जलता है
हर वर्ष जलता है रावण यहाँ

हर ले प्राणी अपने मन को
मन से अहंकारी रावण निकाल

मीत बन सबका सबके दिल मे राज़ कर
मिटा मन से द्वेष और विभीषण जैसा दोस्त बन

क्रोध अहंकार जैसे लंका में विजय कर
और भरत लक्ष्मण जैसे भाई बन

हर वर्ष जलता है रावण यहाँ
अहंकार की जीत है ये

राम भगत

दशहरा की हार्दिक सुभ कामनाये