मुझे दुःख होता है /हेमन्त पांडेय

मुझे दुःख होता है !
जब देश गलत हाथों में सौप उठता है !
मुझे दुःख होता है !
जब किसी के सपनों का हनन होता है !

मुझे दुःख होता है !
जब खोखली राजनीति को राष्ट्रनीति कहा जाता है !
मुझे दुःख होता है !
जब बगुले को भी हंस बताया जाता है !

मुझे दुःख होता है !
जब भारत जैसी पवित्र भूमि पर दंगा – फसाद होता है !
मुझे दुःख होता है !
जब इंसान इंसानियत को शर्मसार कर देता है !

मुझे दुःख होता है !
जब देश के गद्दीधर ही देश का पलीताधार करते हैं !
मुझे दुःख होता है !
जब गरीब भूखा सोता है और अमीर खाना बर्बाद करता है!

मुझे दुःख होता है !
जब किसी अबला पर अत्याचार होता है !
मुझे दुःख होता है!
जब शिक्षा के नाम पर व्यापार होता है !

मुझे दुःख होता है !
जब देश का पैसा सदनों की बैठक में बर्बाद होता है !
मुझे दुःख होता है !
जब देश का शोषण खुले आम होता है !!

मुझे दुःख होता है !
जब मुर्दों से भी पैसा वसूल होता है !
मुझे दुःख होता है !
जब गायों का कतलखानों में क़त्ल होता है !

मुझे दुःख होता है !
जब हमारी अदालत में एक ही मुकदमा पीढ़ी दर पीढ़ी चलता हैं !
मुझे दुःख होता हैं !
जब धर्म के नाम पर अधर्म का आडम्बर रचा जाता है !

मुझे दुःख होता है !
जब भारत जैसे पवित्रता के देश में अश्लीलता का प्रचार होता हैं !
मुझे दुःख होता है !
जब माँ – बाप से बेटा जबान लडाता हैं और वृद्धा आश्रम में छोड़ आता है !

मुझे दुःख होता है !
जब बाप अपने ही बेटे को दहेज के बाजार में नीलाम करता है !
मुझे दुःख होता है !
जब किसी बेटी की डोली दहेज़ के बिना देहलीज के पार नहीं होती है !

ये कवि हेमन्त इक बात कहता है !
जो दुःख के साथ अपने सीने का दर्द कहता हैं !
मुझे दुःख होता है !
जब देश से और देश के बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ होता है !!

कवि – हेमन्त पाण्डेय (अमेठी )
9082747967

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