दुनिया छोड़ दे/अरमान बाबू

दुनिया छोड़ दे

नर्म फिज़ाओ ने ली हैं करवट तो पीना छोड़ दे!
रिन्दों में जाऊ तो वो अपने रुख से पर्दा छोड़ दे!!
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डालिया सूखती रहेगी,पत्ते झड़ते रहेंगे आँगन मे!
ऐसा तो नही कि हम शजर को अकेला छोड़ दे!!
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देखा जो हुस्न-ए-यार तो तबियत मचल गई!
ख़्वाब तो छोड़ दिया क्या अब दुनिया छोड़ दे!!
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उसके मकां की तरफ से ये हवा जो चली है!
सहज़ादी से कहो कि मुझे अब तड़पाना छोड़ दे!!
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इश्क़ में इस कदर मेरे चेहरे पर गुबार था!
बेहया बेगाने शहर मे इश्क़ की तमन्ना छोड़ दे!!
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अपनी शोहरत पर गुमाँ क्यों करू मजार बाकी है!
तू अपने दिल को अरमान कभी तन्हा छोड़ दे!!
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*अरमान बाबू…*

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