नारी की महिमा ।

खूबसूरत है बड़ी भारत की संस्कृति
जिससे है जुड़ी हर नारी की प्रकृति
एहसास कराती जो दुर्गा की शक्ति
बन सीता वो हर दिल में बसती।

भक्ति में शक्ति, शक्ति मे नारी
दुर्गा, लक्ष्मी, सरस्वती है नारी
जिंदगी के हर रूप रंग में नारी
मां, बहन,बेटी, जीवनसंगिनी है नारी।

नारी बिन अधूरा ये संसार
क्यों करता है वो इसका तिरस्कार
हर पल करता है इसपर अत्याचार
सब मिल कर करो इस पर विचार।

कल्पना चावला हो या इन्दिरा की कहानी
गिन लें उपलब्धियाँ नारी की ,दुनिया दीवानी
खूब लड़ी मस्तानी वो झांसी की रानी
नारी बिन कुछ नहीं ,क्यों तूने न मानी।

नारी ही जननी, नारी ही भरणी
नारी ही त्रिलोक तारिणी
नारी बिन अधूरी सबकी कहानी
कर अपमान नारी का न कर नादानी।

भारतीय नारी मे है प्रबलता
हिरनों सी है उसमें चंचलता
दिव्यागन्ध सी वाणी में मधुरता
मुस्कुराहट मे अजब सी रमणीयता।

अबला नहीं सबला है नारी
सहनशीलता की मिशाल भी नारी
प्रेम का प्रतीक है नारी
काली का रूप भी नारी।

नारी की महिमा है अपंरम्पार
आंचल मे जिसके प्यार बेशुमार
ढल जाती है हर माहौल अनुसार
दिल से नमन उसे हर बार।

आशिमा बन्याल
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