पल पल रंग बदलता है/वी पी ठाकुर

पल पल रंग बदलता है ,
जीवन,
कभी शीत सा,
ठिठुरता है,
कभी वसंत सा,
महकता है ,
कभी ज्येष्ठ की दुपहरी की,
तपिश झेलता है,
कभी सावन की बरसात सा ,
सिसक सिसक रोता है,
एक दिन,
पतझड़ सा ,
मुरझाता है ,
“परिवर्तन प्रकृति का नियम है”
कभी इन शब्दोँ
का प्रैक्टिकल लगता है जीवन|

वी. पी. ठाकुर
कुल्लू

3 comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *