देखा है हमने/आशिमा बन्याल,

देखा है हमने।

देखा है हमने लोगों को बदलते हुए
बिन गलती के इन्सानों को तड़पते हुए
पापियों को हर पल फलते फूलते हुए
देखा है हमने मासूमों रोते बिलखते हुए।

पाखण्डियों के लिए लोगों को लड़ते हुए
बेईमानी को हँसते खिलखिलाते हुए
ईमानदारी का दम पल पल घुटते हुए
नफरत की नागिन को फुंकारते हुए।

आध्यात्मिकता की आड़ मे मासूमो को बहकाते हुए
ईश्वर, अल्लाह के नाम पर इन्सान को मूर्ख बनाते हुए
देखा है श्रीकृष्ण व श्री राम की धरती को बदलते हुए
देखा है हमने कलयुग की राह पर इन्सान को चलते हुए।

प्यार – मोहब्बत चैनो अमन की दुनिया
बन गई है अब चीखोपुकार की दुनिया
भ्रष्टाचार की दुनिया अत्याचार की दुनिया
मौत का ताण्डव फैलाती बदलती ये दुनिया।

देखा जो दुनिया के लोगों को बदलते हुए
हम भी उठ खड़े हुए ये जिद्द लिए हुए
बदलेंगे हम भी लोगों को सच्चाई के लिए
प्यार मोहब्बत और भाईचारे की भलाई के लिए।

क्या है यह सम्भव कलम की ताकत के इस्तेमाल से
सुना है यारो घड़ा भर जाता है पानी की बूंद बूंद से
आओ मिलकर बांधे इस जग को प्यार की डोर से
डाल हवनकुंड मे कुरीतियाँ मिटा दें दुष्टों को जग से।

आशिमा बन्याल, हमीरपुर।
फोन नं: 9418151255

3 comments

  1. आपकी सोच को मैं सलाम करता हूँ !
    बहुत प्यारी कविता है ये कविता नहीं आपके ह्रदय के वो भाव हैं जो हर शब्दों के रूप में हर दिल को छू जाते हैं!

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