उखड़ती सासें

चला जा रहा था
सासों के आंचल में
सपने लिये ।
कभी उखड जाती सांसें
कभी सपने हो जाते धुंधले ,
उखडती सांसों ने,
घुघले सपनों का ,
नहीं छोडा साथ ,
चलती रही जिन्दगी,
साथ साथ चला,
यादों का धुआं ।
पर खुस हूं,
सांसों सपनों
के इस रिश्ते में,
यादों के धुऐं
के पीछे की
अदृष्य चिंगारी,
मेरे जीने की
वनी रही प्रेरणां।
चलती रही जिन्दगी,
और चलता रहा मैं,
चलता रहा ।