आते रहना ख्वाबों मे…..

वह इतना दूर है फ़िर भी पास है
क्यों की खुशबू उसकी जो साथ है

अकेला हूँ तो क्या उसकी तस्वीर तो साथ है
हमेशा चलते रहते है मैरे दिल दिमाग मे उसकी तस्वीर

मेरी वफ़ाओं पे उसको यकीं न आया कभी
हिफ़ाज़त उसकी फ़िर भी दिन रात करूँगा

मिला न तुमको मिलेगा कभी न मुझ सा दोस्त
रहूंगा साथ तुम्हारे चाँद सितारों की तरह

मैं इस उम्मीद में जीता हूँ रोज़
सँभाल कर रखोगे दिल मैरा

यही है आरजू बस इक यही तमन्ना है
तुम रोज़ आते रहना ख्वाबों मे मैरे

राम भगत