हंसी आती है

हंसी आती है मुझे ,उनकी मासूमियत पर
नजाकत पर, लयाकत पर और उनकी शराफत पर।

दुनिया की नजर मे शराफत का नकाब,
सच्चाई छुपा ली है ,बंद पलकों मे बेहिसाब,
खुल जाए गर दिल की ये किताब,
उंगली उठ जाएगी उनकी लयाकत पर,
हंसी आती है मुझे उनकी मासूमियत पर।

जी मे आता है बेनकाब कर दें उनको मगर,
सच्चाई की राह की मुश्किल है डगर,
सबूत मांगती है दुनिया की हर नजर,
सब पर है उनकी नजाकत का असर,
हंसी आती है मुझे उनकी मासूमियत पर।

भगवान भी गमगीन हैं मेरे हालात पर,
कयामत ना आ जाए यारो मेरी शराफत पर,
बदलेंगे एक दिन ख्यालात सबके,
विश्वास रख ऐ दिल समय की ताकत पर,
अपनी दृढ शक्ति और हिमाकत पर।

हंसी आती है मुझे, उनकी मासूमियत पर
नजाकत पर, लयाकत पर और उनकी शराफत पर।

आशिमा बन्याल, हमीरपुर
फोन नं: 9418151255