काश मेरी कलम कुछ/हेमन्त पांडे

काश मेरी कलम कुछ यूँ बोले ,
कि नेताओं का सोया ईमान डोले !
सताया बहुत रुलाया बहुत ,
अब इनके गुनाहों का भी हिसाब बोले !!

वादा एक भी न पूरा हुआ ,
उस पर भी ये खुद को पाक बोले !
चुनावों पर ये बहुत खूब बोले ,
चुनावों के बाद जनता की गलियों में कभी न डोले !!

खामोश जनता के चेहरों पर ,
हजारों सवाल बोले !
उत्तर एक भी न मिला और ,
देश का पढ़ा लिखा युवा बेरोजगार डोले !!

हर पाँच साल पर एक नया चेहरा नया बोले ,
बोले बच्चन में ही गुजारे पाँच साल सबने !
जनता के दिलों में अब न ये डोले न वो डोले ,
खोखले इरादों की अब सिर्फ झूठी बुनियादें ही बोले !!

काश कवि (हेमन्त) की कलम कुछ यूँ बोले ,
कि जनता का हर दर्द बयां कर डाले !!
ये नेता भी अपनी सोई नींद से जागे ,
और जनता के प्यारे सपनों को पूरा कर डाले !!

कवि – हेमन्त पाण्डेय (अमेठी)
9082747967

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