नशा होता बड़ा खराब/नंद किशोर परिमल

शीर्षक (नशा होता बड़ा खराब)
कहते हैं कि नशा होता बड़ा खराब।
कोई न देखे कभी जीवन में इसका ख्वाब।
नाम अनेकों इसके जैसे, भांग, सिगरेट, तंबाकू, चरस और शराब।
एक बार मुंह जिसके लगता, न फिर छोड़े कभी उसे जनाब।
नशेड़ी न जाने बेटी बहन को, न यह देखे कौन है माई बाप।
सबसे बड़ा उसे नशा प्यारा, इससे बड़ा है भला क्या अभिशाप।
अनेकों घर यह बर्बाद है करता, रिश्ते जग में अनेक यह तोड़े।
जिस जिसने भविष्य बर्बाद हो करना, नशे से अपना वह नाता जोड़े।
आज तो जिनको नशा लगता प्यारा, समझो भविष्य उनका बर्बाद हुआ।
छोटी उम्र में गुलाम जो बने इसके, अल्पायु में उन सब का देहांत हुआ।
नशेड़ी से कोई बात करे न, सब ही उससे कन्नीं काटें।
अच्छी चीज अगर यह होती, तो घरवाले क्यों उसको डांटें।
एक बार यह जकड़े जिसको, छोड़े न फिर उसको चारों याम।
दास बना कर उसको रखे अपना, पहुंचाता आखिर यमराज के धाम।
लाख लगा लो जोर तुम चाहो, नशा न छोड़े उसका साथ।
एक वार जो गले लगाया, फिर यह न छोड़े उसका हाथ।
जितने भी जग में अपराध हैं होते, यह नशा ही उनका कारण होता।
मार काट, चोरी यारी, बैंक डकैती, सबमें नशे का ही नाम है आता।
खेद कि सरकारें भी नशे को, आय का साधन आज बनातीं।
नागरिकों का जीवन बर्बाद करें, प्रावलम्बन की ओर उन्हें ले जातीं।
नशा सर्वनाश करे उस मानव का, जिसने इसका वरण किया।
एक बार मुंह लगा यह जिस के, हटने का कभी इसने नाम न लिया।
कभी इसके पास न जाना, जीवन अपना बर्बाद न करना
परिमल इसके दोषों को देखो, कभी भी नशे का नाम न लेना।।
नंदकिशोर परिमल, गांव व डा. गुलेर
तह. देहरा, जिला, कांगड़ा (हि_प्र)
पिन. 176033, संपर्क. 9418187358

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