दर्द में भी खुश थे/राम भगत नेगी

..दर्द में भी खुश थे ….

सुरत और सीरत में अंतर है
जीने का यहाँ अलग मंत्र है

कुदरत का नियम
और इंसान का संयम

दोनों में अंतर है
जीने का यहाँ अलग मंत्र है

चारों और यहाँ रोशनी तो है
पर किसी की रोशनी सदा के लिये धुंध में

चल रहे है जीने के लिये
लड़ रहे है जीने के लिय अपनों से कुदरत से

मन की बात में भी करता
यहाँ दर्द में दवा भी देता

सब सम्पति सारी कायनात फीकी
जब देह का सुख ना हो

दर्द में भी खुश थे
जो मौत के करीब थे

और राम भगत गवाह
बिना मंत्र के स्वाहा

सुरत और सीरत में अंतर
जीने का अलग मंत्र

राम भगत
9816832143

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