दिल में ही दिल की बात/डॉ कंवर करतार

ग़ज़ल

दिल में ही दिल की बात दबा कर चले गए I
जलता हुआ वो दीप बुझा कर चले गए II

सोचा था बातें उनसे करेंगे तो प्यार की ,
वो आए बस नजर ही मिला कर चले गए I

दर्द-ए-जिगर को हमने भुलाया कभी का था ,
फिर मुद्दतों की टीस जगा कर चले गए I

उनसे बिछुड़ के सीख रहे मुस्कराना हम ,
इक बार फिर से और रुला कर चले गए I

हम जिन्दगी के समझे थे कुछ और ही मायने ,
अपना सा क्यूँ न मुझ को बना कर चले गए I

रहवर बने रहे वो उन्हें जब तलक लगा ,
फिर रास्ते में हाथ छुड़ा कर चले गए I

गुमसुम से क्यूँ हैं बैठे ये ‘कंवर’ ने पूछा तो ,
‘झोंके से आए हम को हिला कर चले गए I’

कंवर करतार
‘शैल निकेत’ अप्पर बड़ोल दाड़ी
धर्मशाला हि .प्र.
9418185485

4 comments

  1. नवीन जी, संजीव सूद जी और अनिल जी आप की ज़र्रानवाजी के लिए आभार आपका। नमन ।

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