शीर्षक(हिंदी दिवस पर)
हिंदी दिवस पर मुस्काए हिंदी।
अपनी हालत पर चिढ़ जाए हिंदी।
अपनों में बेगानी बनी यह हिंदी।
दक्षिण में प्रचार प्रसार है चाहे हिंदी।
सारे भारत की सिरमौर है हिंदी।
जन जन की प्यारी भाषा हिन्दी।
अपनी सरकारों से है उपेक्षित हिंदी।
कवि साहित्यकारों की भाषा प्यारी हिंदी।
कहने को तो राष्ट्रीय भाषा कहलाए।
हिंदी दिवस पर नेताओं को याद दिलाए।
फर्ज निभाते कैसे अपना, बारम्बार है यह समझाए।
बातों से नहीं बात है बनती, इसी बात को यह मां बतलाए।
मन – कर्म और वाणी से सब अपना फर्ज निभाओ।
हिंदी हो तुम हिंदी को अपने गले लगाओ।
पूरे देश में हिंदी को ही प्रचलन में लाओ।
परिमल कहता फिर ही तुम हिंदी दिवस मनाओ।
नंदकिशोर परिमल, गांव व डा. गुलेर
तह. देहरा, जिला. कांगड़ा (हि_प्र)
पिन. 176033 संपर्क. 9418187358