आँशू मेरी आँखों के ओझल हो गए ,
कुछ पुरानी यादों में जब हम खो गए !
कर्मपथ की चाहत में नम आँखों से भी ,
हम अपने हर दर्द बयां कर गए !!

मुस्काता सफर मुस्कुराती मंजिल,
मैं और मेरी मंजिल वो से हम हो गए !
मैं अकेला ही चला था अपनी मंजिल को पाने ,
रास्ते में मुसाफिर मुस्कुरा कर कई यूँ ही हो गए !!

जब मिली मंजिल तब सुकूं में हम खो गए ,
याद आ रहा था वो पहला कदम जहाँ से मैं हम हो गए! अपनी जिन्दगी से हर ग़म गुजर गए ,
ग़मो भरी जिंदगी में ग़मो से याराना जो हम (हेमन्त) कर गए !!

कवि – हेमन्त पांडेय