(मैं युवा हूँ )
खुद को बनाने में डूबा हूँ
पहचान मुझको मैं युवा हूँ!
जब तक मैं सीधा हूँ
तेरी सत्ता की आयु हूँ
जब उलट गया तो वायु हूँ !
मैं भगत सिंह हूँ, गाँधी हूँ
सिंहासनो को उखाड़ फेंके जो
मैं वो आँधी हूँ
महसूस कर यह जो हलचल हैं
मुझको काबू करना मुश्किल हैं
मैं पर्वतों को हिला सकता हूँ
तुझको मिट्टी में मिला सकता हूँ
डरता नहीँ ह्कूमतो से
मैं सिंहासन खाली करवा सकता हूँ
कुच्छ गलतीयां मेरी हैं
यह जो गलियां तेरी हैं
तुझको बनाया हैं “सरकार”
और खुद बना हूँ बेरोजगार
क्या बताऊँ कैसे जीता हूँ
मट्मैला पानी पीता हूँ
कैसे कैसे जलता हूँ
टूटी सड़कों पर चलता हूँ
तू वफा कर मैने तुझको अपनाया हैं
कितने तख्तौ को मिटाया हैं
मत भूल मैने सिंहासन और
ताबूत दोनो को बनाया हैं
:- सुकृत सागर
(गुलेर, देहरा )