बाबे/डॉ पीयूष गुलेरी

बाबे
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डॉ.पीयूष गुलेरी
ढोंगी,दुष्ट,कपत्ते देखे,
हम ने कितने सारे बाबे।
चाकू, छुरियां, कैंची, नश्तर,
बड़े भयंकर आरे बाबे।।१।।
एक हाथ ईश्वर ने पकड़ा,
दूजा गुरु के हाथ है भाई ।
सौंपो तन,मन,धन सब अपना,
करते खूब इशारे बाबे।।२।।
करते दानी बनकर अर्पण,
जनता के धन को हैं नेता।
आलीशान बन जाता आश्रम,
कितने खूब हमारे बाबे ।।३।।
बाबाओं की जादू नगरी,
एशो इशरत इनका धंधा ।
लूट रहे हैं जबरन अस्मत,
झिलमिल झिलमिल तारे बाबे ।।४।।
ऐकटर हैं डायरेक्टर रुकते,
पी .एम, सी.एम नेता झुकते ।
कुछ भी करने से न चुकते,
भैय्या! तभी तुम्हारे बाबे ।।५।।
इज़्ज़त लूटी, दौलत पाई ,
लोगों की धरती हथियाई।
दोषी, चोर, उचक्के बेशक,
कहते भक्त, हमारे बाबे ।।६।।
करते हैं लीलाएं नाना ,
धन दौलत भी, खूब खजाना।
साध्वियों संग ऐक्टिंग करते ,
फ़िल्मी हुए सितारे बाबे ।।७।।
जाता नेताओं का जत्था,
साष्टांग हो टेकें मत्था ।
राजनीति मुट्ठी में इनकी,
गूंजें बनकर नारे बाबे ।।८।।
अलीबाबा रो रोकर कहता ,
मेरा चालिस चोर चालीसा ।
कोटि-कोटि चोरों के नेता ,
ये तो हैं हत्यारे बाबे ।।९।।
राम,रहीम ये कैसे स्वामी ,
निर्मल बनते शर्म न आती।
ऐंठ रहे हैं ठनक रुपैइया ,
थुलथुल भरकम भारे बाबे ।।१०।।
ईश्वर का है अद्भुत फंडा ,
शोर न करता उसका डंडा ।
फोड़ दिया जब उसनेे भंडा ,
रो, रोकर तब हारे बाबे ।।११।।
देखी! इनकी नेक कमाई,
पहुंच गये जेलों में भाई ।
ख़ूनी मर्मांतक हत्यारे ,
कितने प्यारे प्यारे बाबे ।।१२।।
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अपर्णा-श्री हाऊसिंग बोर्ड कालोनी
चील गाड़ी धर्मशाला हिमाचल-प्रदेश
पिन १७६२१५
मो.९४१८०१७६६०

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