तेरी खामोशियां …

तेरी खामोशियां आँखों से झलकती है
और मेरे दिल में उतरती है

मुद्तों बाद तेरी रूह से मुलाकात हुवा
ये फलसफा भी अजीब हुवा

बरसते मौसम की तरह
आज भी तुम बरस रहे थे

और हम चुप चाप
तेरी गुस्ताखी का आनंद ले रहे थे

ये खामोशी कब तक यूं ही स्तायेगी
हम चले है अब तेरी बहुत याद आयेगी

तेरी खामोशियां …..
और मेरे …….

राम भगत