इश्क में दिल बेदार कर लेना
दिल पे फिर चाहे वार कर लेना

साथ हम राह बन के देख मेरा
चाहे फिर आर पार कर लेना

ज़िन्दगी बीत जाये ना यूँ ही
इस पे थोड़ा विचार कर लेना

पल में रिश्ते मिटा नहीं करते
वक़्त का इंतिज़ार कर लेना

ऐब खुद के नजर नहीं आते
इस पे तो ऐतबार कर लेना

कर ले इक मर्तबा वफ़ा हमसे
फिर बहाने हजार कर लेना
( लक्ष्मण दावानी ✍ )
15/5/2017
आई – 11 पंचशील नगर
नर्मदा रोड़ ( जबलपुर म,प्र, )