गद्दार देश का/नवीन हलदूणवी

“गद्दार देश का”

नवीन हलदूणवी

गुरु वही है
जिसके गुर से
मानव जग में
गुरुता पाए
अथवा
जिसके दरवाजे पर
भूखा आ कर
रोटी खाए ।
परचू देना …
रिश्वत लेना
सचमुच गुरु का
काम नहीं है ।
नकल करा कर
नाम कमाने
का अच्छा परिणाम नहीं है ।।
ऐसे नर को
लोक कहें ….
भाड़े का टट्टू ।
और उसी के
चेले – चांटे
बनें निखट्टू ।
गुरु-पद की
गरिमा को भूल
करे देश की जड़ें खोखलीं
वह नर तो गद्दार देश का ।
गद्दार देश का….गुरु नहीं
……… गद्दार देश का ।।

नवीन हलदूणवी
09418846773
काव्य-कुंज जसूर- 176201
जिला कांगड़ा, हिमाचल l

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