मन शत् प्रणाम कर गुरुजन को/डॉ मीना कौशल

मन शत् प्रणाम कर गुरुजन को,
जिसने भी किया निर्मल मन को।
पथ किया तमस् से ज्योतिर्मय,
सद् मय चिन्मय कर जीवन को।।

कर तिमिर नाश भर नव प्रकाश,
सर सरित प्रवाहित ज्ञान किया।
निज नेह नवल रस सिंचित कर,
जीवन में विमल विहान किया।।

प्रथम गुरु है माँ अपनी,
है प्रथम सद्नमन माता को।
माँ अम्बर प्रथम पाठशाला,
जननी जीवन की विधाता को।।

पुनि सतत् नमन पितु पद वन्दन,
कर रहा अमल मन अभिन्दन।
जिसने पग पग पे सिखाया है,
मन करो तात का सद् वन्दन।।

पुनि जीवन के सब गुरुजन को,
शत् सतत् प्रणाम हमारा है।
जिसने जीवन की नैया को,
प्रतिपल शिक्षा से सँवारा है।।
Dr. Meena kumari

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