एक और देखिए

फिरता है जो सडकों पर यूं ही वो आवारा मैं ही हूँ,
देखता है नजारे भूख तडफ के वो बेचारा मैं ही हूँ |
यहाँ मेरा कातिल न मिलेगा कहीं ढूंढने वालो,
कत्ल जिसने किया मेरा वो हत्यारा मैं ही हूँ |
किये थे वादे ज़िन्दगी भर साथ निभाने के,
तन्हा छोडकर चल दिये जिसे साथी वो तुम्हारा मैं ही हूँ |
तन्हाई की लम्बी रात में दौड़ते हैं गम मुझे काटने को,
जीते जी मरा सा है वो गम का मारा मैं ही हूँ |
बढ़ती है शानो शौकत धोखे, झूठ और फरेब से,
मुंह फेर इनसे पारसा जा बना वो न्यारा मैं ही हूँ |
चाल चल तू भी शतरंज की इस बाजी में सुधांशु,
इत्तेफाकन जीत ही जाये अब तक का हारा मैं ही हूँ |
संजीव कुमार सुधांशु
गांव व डाकघर च्वाई
त. आनी जिला कुल्लू (हि. प्र.)
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70188-33244..