गजल
दुनिया में आकर हमें क्या मिला ,
किसको क्या कहें किससे करें गिला?
आसमां में सितारे थे कहकशाँ थी,
यहां इन्सान भी रूपे हैवां में मिला |
जोरे बाजू से काम करने वाले भूखे मरें,
बडे नित दावतें उडायें है यह कैसा सिला?
सोचा न था ऐसा दौर भी देखेंगे,
राम रहीम के वेष में शैतान मिला |
दिले चमन सूख कर आज सेहरा हो गया,
जबकि उनका है गुलाबे बदन खिला |
सुधांशु माना कि दुनिया एक धोखा है,
कैसे कहें कुछ न मिला, धोखा जो मिला |
संजीव कुमार सुधांशु
गांव व डाकघर च्वाई
त. आनी जिला कुल्लू (हि. प्र.)
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